जहरीला खाना खईला से तीन गैँडा मुवल

चितवन, १९ माघ,
चितवन राष्ट्रिय निकुञ्ज मे कालगति से मरल १४ गैँडा मेसे तीन जहरीला सामान खईला से मरल बा । शनिचर के दिने पूर्वी नवलपरासी के सेहेरी मे मृत फेला पडल गैँडा जहरीला खाना के कईला के चलते मुवल प्रारम्भिक अध्ययन देखवले बा ।
निकुञ्ज के वरिष्ठ पशु चिकित्सक डा विजय श्रेष्ठ के मुताविक बितल हप्ता तमासपुर क्षेत्र मे एगो गैँडा आ एक महिना पहिले गाँजीपुर क्षेत्र मे दोसर एगो गैँडा जहर खईला के चलते मरल प्रारम्भिक अध्ययन देखवले बा । बितल हप्ता मुवल गैँडा के पेट मे १० महिना के बच्चा भी रहल रहे ।
श्रेष्ठ के मुताविक उ गैँडा के आन्द्रा आ पेट मे रक्तश्राव भईल लास परीक्षण मे देखल गईल बा । यद्यपि कारण प्रष्ट होखे खातिर विषादी परीक्षण करे खातिर प्रयोगशाला के खोजी हो रहल उ जानकारी देहनी ।
श्रेष्ठ कहनी कि, “उ गैँडा के अङ्ग के नमूना सुरक्षित रखले बानी, कहाँ विषादी के परीक्षण होखी बुझेके काम हो रहल बा ।” मुवल तीनु गैँडा के आउर महत्वपूर्ण अङ्ग मे कउनो समस्या ना देखल गईल उ बतवनी ।
सभी गैँडा के पेट मे तोरी देखल गईल कहत उ जहरवाला तोरी के चलते मुवल भी हो सकेके अनुमान कईल जानकारी देहनी । यद्यपि प्रयोगशाला से परीक्षण भईला के बाद मात्र यकीन कहे सकेके उनकर कहनाम बा ।
शनिचर के दिने सेहेरी मे मिलल गैँडा भाले ह आ आउर दु गो पोथी गैँडा ह । एकरा सँगे आउर कालगति से मुवल गैँडा बुढ होके, लडके, दलदल मे फँसके आ करेन्ट लाग के मुवल उ बतवनी ।
बितल कातिक से चालू महीना तक प्राकृतिक कारण से बहुते गैँडा मरल निकुञ्ज के तथ्याङ्क मे उल्लेख बा । बितल साल प्राकृतिक कारण से ४३ गैँडा मरल रहे । ई बरीस सात महिना पुगे लागला पर १४ गैँडा मरल बा ।
तुलनात्मक हिसाब से कम गैँडा मरला पर भी निकुञ्ज से प्राकृतिक कारण के मृत्यु दर आउर घटावे खातिर गृहकार्य मे रहल जनवले बा ।
वन मन्त्रालय प्राकृतिक कारण से गैँडा मरला के चलते पत्ता लगावे खातिर समिति भी गठन कईले बा । पहिलका बरीस मे भी वार्षिक २५ हाराहारी गैँडा कालगति से मुवल तथ्याङ्क बा ।
हरेक पाँच÷पाँच बरीस मे गैँडा गणना कईल जाला । पिछिलका गणना मुताविक उ निकुञ्ज मे ६०५ गैँडा रहल रहे । ई बरीस निकुञ्ज मे गैँडा गणना करत बा ।






