श्री राधाकृष्ण भगवान कट्टी मठ के सम्पति मे समिति के अध्यक्ष साह के मौजमस्ती

अजय चौरसिया
वीरगंज २८ असाढ
पर्सा जिल्ला के पकहामैनपुर गाँवपालिका वार्ड नं. २ स्थित एतिहासिक श्री राधाकृष्ण भगवान कट्टी मठ ओझेल मे पडत गईल बा ।
बितल २ सय बरीस लम्हर इतिहास रहल ई मन्दिर संरक्षण के खातिर गठन भईल मन्दिर संचालक समिति स्थापना भईल समय से हि दिन पर दिन मन्दिर के बहुमुल्य सामानसब भुलईला के साथे मठ के नाम मे रहल जमिनसब अतिक्रमण के सिकार होत गईल स्थानीयलोग आरोप लगवले बाडन ।
वि.स. १९१३ साल से विधिवत रुप मे स्थापित उ मठ मे रहल भगवान राधा कृष्ण के मुर्ति मे रहल चाँनी के मुकुट, बाँसुली, चंगी तथा बहुमूल्य शालिकग्राम पत्थरसब भुलाईल बा ।
एहितरे मठ के नाम मे रहल ८५ विगहा जमिन भी अतिक्रमण के सिकार बनल बा ।
साविक सुर्जाहाकटिट् गाविस स्थित उ मठ के जमिन उ आसपास क्षेत्र के अनेकन गाँव मे रहल बा । ८५ विगहा जमिन अभी अतिक्रमण के सिकार होके ६५ विगहा मे पुगल बा ।
उ भी ६५ विगहा जमिन मे संचालक समिति के अध्यक्ष दिनानाथ साह मौजमस्ती कर रहला से उ जमिन असुरक्षित भईल बा ।
अनेकन दाता मन्दिर के नाम मे देहल जमिन के दाम अभी लाखो करोडों मे भईला के बाद संचालक समिति के गिद्धे नजर पडल बा ।
मन्दिर संरक्षण करे खातिर गुठी संस्थान के पहल मे २०५७ साल से स्थानीय दिनानाथ साह के अध्यक्षता मे ९ सदस्यीय संचालक समिति गठन भईल रहे ।
उ समय से अभी तक लगभग २ दशक तक साह मन्दिर के जमिन मे एकलौटी मोजमस्ती कर रहल बाडन ।
मन्दिर के नाम मे रहल जमिन मे निजी खेतीपाती कईला के साथे कुछ जमिन मे आपन मनमौजी तरिका से टेण्डर आह्वान करके आपन आसेपासे आदमीसब के ठेक्का मे देके उ वापत के रोपेया लेके कउनो हिसाब किताब ना कईल स्थानीयलोग के आरोप बा ।
ठेक्का मे देहल पोखरा के कउनो हिसाब किताब नइखे । ठेक्केदार से ठेक्का बापत के रकम संचालक समिति के अध्यक्ष दिनानाथ साह के देत आईल बाडन माकिर उ पईसा के कउनो अतोपतो नइखे ।
एहितरे गाँव के अनेकन किसानसब प्रति कठ्ठा ६० किलो के हिसाब से संचालक समिति के अध्यक्ष के धान देत आईल बाडन माकिर उ धान मठ मे ना जाके संचालक समिति के घर मे पुग रहल स्थानीयलोग के कहनाम बा ।
मन्दिर के जमिन मे करिब २ लाख मूल्य बराबर के सिसौ के गाछि रहल अवस्था मे अध्यक्ष साह ओकरा के कटवा के मन्दिर निर्माण के सामानसब बनवले बाडन आ उहे निर्माण के खातिर गुठी सँस्थान से १५ लाख रोपेया बजेट भी निकाशा करवले बाडन ।
उ भी अधिुरे बा, तीन बरीस बितला पर भी अलपत्र अवस्था मे बा । म
मर्मत सम्भार के खातिर भी गुठी सँस्थान से पईसा निकाशा कईल बा माकिर उ भी होखे नइखे सकल, दु बरीस से मन्दिर मे बाँस लगाके ओईसहि छोडल गईल बा ।
उलोग के मुताविक मन्दिर संरक्षण के नाम मे संचालक समिति गठन भईल समय से हि मन्दिर के असितत्व हि समाप्त होत गईल आरोप लगवनी ।
मन्दिर संचालक समिति परिवर्तन के खातिर वितल ५ बरीस से अदालत मे मुद्दा चल रहल बा माकिर अध्यक्ष साह स्थानीयलोग के अनेकन मुद्दा मामिला मे अल्झाके गुठी सँस्थान से आपन कार्यकाल थप करा के अध्यक्ष पद मे रहत आईल बाडन । गुठी सँस्थान से भी एकर चित्त बुझेवाला जवाफ नइखे ।
कउनो किसिम के हिसाब ना करके अध्यक्ष साह के कार्यकाल गुठी सँस्थान से बेर बेर थप कईले बा ।
गुठी सँस्थान के मुताविक उ समिति हिसाब फर्छयौट कईला तीन बरीस भईल, अभी मुद्दा चलि रहला के चलते रोक्का कईल बतावल गईल बा ।
हरेक दु बरीस मे संचालक समिति के आदमीसब परिर्वतन होके हिसाब फर्छयौट करेके चाहिं, माकिर हिसाब के त बात छोडि संचालक समिति भी बदले नइखे सकल ।
मन्दिर के जमिन के हिसाब खोजला पर अध्यक्ष साह अनेकन ठेकेदार मार्फत अनेकन बहाना मे स्थानीयलोग उपर मुद्दा दिउवा के आपन कार्यकाल बढावत आईल बाडन ।
अध्यक्ष साह आपन मनमानी रुप मे मन्दिर मे ३ जने पुजारी रखले बाडन ।
एक जने के महिना के १५ हजार आ दु जने के महिना के ८ हजार के हिसाब से तलब देत आईल बाडन जबकी आज तक उहाँ रहेवाला पुजारी के तलब के नाम मे एक पईसा देहल गईल नइखे । मठ के नाम मे रहल जमिन से ५ कठ्ठा जमिन पुजारी के जोतभोग करे देहल बा ।
अईसन अईसन बहुते क्रियाकलापसब करत अध्यक्ष साह मन्दिर के सम्पत्ति के सखाप करेके चलखेल मे लागल उलोग के अरोप बा ।
माकिर ई सब विषय मे संचालक समिति अध्यक्ष के कहनाम दोसरे बा । संचालक समिति के अध्यक्ष दिनानाथ साह के मुताविक मन्दिर के नाम मे ८५ विगहा जमिन ना ६५ विगहा रहल जमिन मेसे करिब २० विगहा जमिन ठेक्का मे लगावल, कुछ जमिन मे २ गो पोखरा, कुछ जमिन मे मोही कायम भईल आ बाँकी कुछ जमिन पर्ति रहल बतवनी ।
ठेक्का वापत के रकम समिति के खाता मे सुरक्षित रहल बा माकिर दु तीन बरीस से हिसाब किताब फर्छयौट ना कईल स्वीकारनी ।
मन्दिर के बहुमुल्य सामान भुलाईल कहके विषय मे खुद के कुछो जानकारी ना भईल कहत अध्यक्ष साह हमरा देखताभर मे मुर्ति मे कउनो किसिम के चाँदी के मुकुट, बाँसुली लगायत के बहुमूल्य सामान ना रहल बतवनी ।
जउन अवस्था मे मन्दिर रहे उहे अवस्था मे अभी भी रहल कहत मन्दिर विकास मे स्थानीयलोग हि बाधक रहल बतवनी ।
मन्दिर विकास करे गईला पर स्थानीयलोग हरदम अवरोध करत आईल बाडन । विना कारण अदालत मे मुद्दा डाल के स्थानीयलोग विकास के बाधक बनल बतवनी ।
अभी भी मुद्दा चल रहल बा, ओमे अँझुरा के कुछो करे नइखी सकल, मन्दिर मर्मत के खातिर लियावल सामानसब उहें राख के खराब भईल बतवनी ।





