बेर–बेर भर्ना शुल्क ना लेवे खातिर उच्च अदालत के अल्पकालीन अन्तरिम आदेश

वीरगंज ३१ जेठ

उच्च अदालत जनकपुर अस्थायी इजलास वीरगंज एगो विद्यार्थी से बेर बेर भर्ना शुल्क असुल ना करे खातिर अल्पकालीन अन्तरिम आदेश जारी कईले बा । न्यायाधीश गणेशप्रसाद बराल के एकल इजलास से असाढ ७ गते तक के खातिर अल्पकालीन अन्तरिम आदेश जारी कईले बा ।

अधिवक्ता प्रमोद प्रसाद पर्सा जिल्ला के संस्थागत तथा सामुदायिक विद्यालयसब, वीरगंज महानगरपालिका, शिक्षा विकास तथा समन्वय इकाई पर्सा लगायत ७१ जने के बिपक्षी बनाके रिट दायर कईले रहलन ।

वीरगंज के कैयन निजी विद्यालय एक बेर एगो विद्यालय मे भर्ना भइल विद्यार्थी सँगे उहे विद्यालय के दोसर किलास मे प्रवेश कईला पर भी भर्ना शुल्क लेरहला पर अभिभावक समस्या मे पडल बाडन ।

आदेश मे “पहिले से विद्यालय भर्ना भईल विद्यार्थी से उहे विद्यालय के दोसर किलास मे प्रवेश कईला मे भर्ना शुल्क ना लेवेके ना लेवे लगावेके आ विद्यालय मे पहिलका बेर भर्ना भईला पर एक बेर के खातिर भर्ना होखेवाला किलास के खातिर मासिक पढाइ शुल्क से बेसी भर्ना शुल्क ना लेवे, ना लेवे लगावेके” कहके उल्लेख बा ।

साथे इजलास दुनु पक्ष के बात सुने खातिर असाढ ७ गते अन्तरिम आदेश छलफल करेके सूचना विपक्षी समक्ष पुगावेके कहले बा । सोमार के दिने अदालत मे निवेदक के ओरी से निवेदक अधिवक्ता प्रमोद कुमार, आउर अधिवक्तालोग प्रेम कुमार, रामआशिष प्रसाद यादव, रामचन्द्र सिंह, राम नारायण प्रसाद कुर्मी लगायत के लोग बहस कईले रहलन ।

वीरगंज मे असाढ १ गते से हि विद्यालय भर्ना अभियान सञ्चालन करेके तइयारी बा । वीरगंज महानगरपालिका के शिक्षा अधिकृत हरि राउत एक गो विद्यालय बेर बेर भर्ना शुल्क उठावल गैरकानुनी भईल बतवनी । अईसन समस्या समाधान के खातिर सरोकारवाला सामूहिक रुप मे आवाज उठावल जरुरी रहल उनकर कहनाम बा ।

“नयाँ भर्ना भईल विद्यार्थी से मात्र भर्ना शुल्क लेवेके ह, माकिर शैक्षिक सत्र बदलते मातर अपने विद्यार्थी से भर्ना शुल्क लेहल जाला, उ गैरकानुनी ह” कहत उ “सामुदायिक विद्यालय मे खासे अईसन समस्या नईखे, संस्थागत विद्यालय मे समस्या रहल बा । सरोकारवाला सभी एकर विरोध करेके पडि ।”

अभिभावक संघ वीरगंज के अध्यक्ष अमर गौतम अदालत के अल्पकालिन अन्तरिम आदेश के सकारात्मक रुप मे लेवेके बतवनी । माकिर पिछिलका दिन मे संस्थागत विद्यालय शिर्षक परिवर्तन करके विद्यार्थी से रोपेया असुल रहल उनकर कहनाम बा ।

“हरेक बरीस भर्ना शुल्क लेहल सन्दर्भ मे विरोध भईला के बाद कैयन विद्यालय शीर्षक परिवर्तन करके शुल्क लेवेलन” कहत उ “कैयन विद्यालय एगो बिल मे नेपाली मे अन्य शुल्क कहके लेवेके आ अंग्रेजी मे मिसलेनियस फि कहके लेहल मिलल बा ।”

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