खाद्य उद्योगी भी मँगले उधार असुली कानून

वीरगंज १६ फागुन,

चामल, तेल तथा दाल उद्योगी एक महिना से बेसी उधार मे समान बिक्री करे ना मिलेवाला किसिम से कानुनी व्यवस्था होखेके माग रखले बाडन ।

उलोग चाउर, दाल, तेल उद्योग मे देखल गईल अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा हटावे खातिर अइसन माग रखले बाडन । एकरा से पहिले नेपाल उद्योग परिसंघ भी उधार असुली ऐन के माग कईले रहे ।

नेपाल चाउर, तेल तथा दाल उद्योग संघ के ४३ वाँ बार्षिक साधारण सभा से १० बुँदे निर्णय कईले बा । बियफे के दिने काठमाण्डु मे बईठल साधारण सभा से कईल १० बुँदे निर्णय के पहिलका नम्बर बुँदा मे उधार के विषय के उठावल गईल बा ।

उधार सम्बन्धी कानुनी व्यवस्था ना भईला पर सभस्या भईल नियमन के खातिर कानून लियावे के माग कईल संघ के अध्यक्ष सुवोध गुप्ता बतवनी ।

“चाउर, तेल आ दाल जइसन खाद्य बस्तु बिक्री कईला पर केतना समय के खातिर उधार देवेके आ ओकरा के कईसे व्यवस्थित करेके कहके कानुनी मापदण्ड नइखे, ओकरा चलते उधार मे अराजकता बढल बा ।

बजार मे उद्योग ६ महिना तक के उधार मे उत्पादन बेंचले बाडन” कहत अध्यक्ष गुप्ता, “केतना दिन तक उधार देवे सकेके कहके विषय ऐन मे हि निर्दिष्ट होखेके पडि । एक महिना मात्र उधार देवे सकेके व्यवस्था भईला पर ५ महिना के खातिर अतिरिक्त पुँजी के प्रबन्ध करेके ना पडि । अनलाइन से बिल काटेवाला भईला से एकर नियमन कईल जा सकता ।”

उत्पादन बेंचला पर बैंक ग्यारेण्टी आ १ महिना के एडभान्स चेक लेवेके प्रावधान राखेके उद्योगी के कहनाम बा ।
एहितरे उद्योगीलोग किसान के चेक मार्फत भुक्तानी आ पान नम्बर अनिवार्य के व्यवस्था लागु करेके ना होखी कहके तर्क अगाडि बढवले बाडन । आर्थिक ऐन २०७६÷०७७ से १ हजार से बेसी के सामान खरिद भा आउर खर्च मे पान बिल अनिवार्य जरुरी होखेके व्यवस्था कईले बा ।

चाउर, तेल, दाल उद्योगी के मुताविक एकरा चलते किसान से उत्पादन कईल खाद्य बस्तु उद्योग के सिधे बिक्री करे नइखे सकल । किसानलोग से बैंक खाता आ प्यान ना होखेवाला भईला से बिचौलिया के भर पडेके पडल बा । किसान के उचित दाम मिले नइखे सकल ।

मुसुरी के दाल विदेश निकासी मे ५ प्रतिशत अनुदान देवेके, निर्यातमा देत आईल अनुदान के निरन्तरता देवेके, अप्रशोधित दाल तथा गेडागुडी आ प्रशोधित दाल मे आयात भन्सार महसुल के दर मे २ तह के फरक होखेके, चामल तेल आ दाल के सह उत्पादन राइसब्रान, पिना, चुन्नी भुसी भारत निकासी मे लागेवाला प्रति केजी ५० पईसा निकासी कर खारेज होखेके, चामल, तेल आ दाल उद्योग के कृषि उद्योग सरह के बैंक ब्याज मे अनुदान देवेके, तोरी के तेल मे लागत आईल १३ प्रतिशत मुअकर परिमार्जित करेके तर्क उलोग अगाडि बढवले बाडन ।

“वितल समय मे २ सय के हाराकारी मे तोरी तेल मिल रहे, माकिर भारत से आयातित तेल सँगे प्रपिस्पर्धा करे ना सकला पर करिब १८ गो मे सिमित भईल बाडन । तोरी के गेडा आयात मे १ प्रतिशत भन्सार महसुल से बढा के ५ प्रतिशत कायम कईल गईल बा । ओकरा के पुराना अवस्था मे लेजाए सकला पर तेल उद्योग के राहत मिली कहके हमनी के धारणा बा,” अध्यक्ष गुप्ता कहनी । एहितरे चाउर आयात मे लागत आईल भन्सार महसुल ८ प्रतिशत के बदले १५ प्रतिशत पुगावे के ।धान आयात मे लागेवाला कृषि सुधार शुल्क ५ प्रतिशत के घटा के १ प्रतिशत कायम करेके, नेपाल के चाउर मिल के आधुनिकीकरण करे खातिर सरकार अनुदान देवेके कआ नेपाली बासमती वर्ल्ड क्लास राइस भईला से एकरा के निकासी करे मिलेके उद्योगीलोग के कहनाम बा ।

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