फगुवा के परम्परा ओरा रहल, आधुनिकता बढत गईल

प्रभु यादव

बारा १३ चईत

समाज मे फगुवा के गित सब ओराहल बा । पहिले मधेश मे फगुवा माघ के श्रीपंचमी के दिन समहत के बाँस हला के हरेक दिन सझिया के गाँव के सरेह मे रहल पुअरा, उख के पगार लिया के समहत के बाँस हलावल जगह राखत रहल रहे । एगो गाव के जवान सब दुसर गाँव के समहत केतना जादा बा ओकरा से जादा आपन गाँव के रही कह के एक आपस के सान के बात राख के जम्मा करत रहलन ।

समहत पर एक वेरिया पुअरा चाहे खर लेया के राखला वाद खाना खाके सझिया पहर मे लोक फगुवा के गित ढोलक, झाल, खजरी बजा के गावत रहल रहे । अभि के समय मे ना कहु बाँस हलावल देखल जाला ना कवनो जवान लोग ओकर परमपरा बुझे सकल बा । पहिले ढोलक, झाल, हरमुनिया, खजरी लेके समाज मे सद्भाव आ प्रेम स्नेह के भाव से गित गावत रहल त अभि के जवान लोग बडका बडका साउण्ड सर्विस लेया के समाजिक परामपरा ना सलकल आ विशेष कर के जनानी लोग के लजित कर के गावेवाला अश्लील गित बजा के समाज मे विकृती लियाल बा ।

अब हम कुछ पहिलका फगुवई लोक गित के बात करे के चाहत बानी । फागुन मे घर से बाहर गईल लईका के चिन्ता माई लोग के बहुते लागेला सचे केहु बाहर गईल घर आवेला आ आपन घर परिवार आ समाज मे प्रेम स्नेह से रंग खेलेला जवन बेरा बेटा के ना रहल से माई के कमी लागेला सन्देस देवेला फागुवा गित गावत रहल रहे लोग – घरही कोसीला माई करेली सगुन हो बनही मे राम बितवले फगुनवा हो हो होहो बनमेही राम बितवले फगुनवा हो गित से सन्तोस करावत रहे ।

पहिले पानी के खातिर हर घर घर से ईनार मे जात रहल रहे लोग जवना जगह मे कोई कोई के बाट देख रहल जवना से जाये मे सरमाजाईत रहल ओ याद मे फागुवा गित – कुईया पर धुनिया रमवल जोगी हो, कवन माहे पनिया के जायव बहुत मिठ स्वर मे सभे जवान लोग एक स्वर मे मिला के गावल करत रहे ।

हिन्दु धर्म के पुरान सब जईसन रमायण मे राम बनवास निलक के गईल रहलन जवना बेर स्नान कईल जगह के दर्शावेला फागुवा गित – राम नहईले गंगा हो रमरेखवा घाट गित से ईतिहास जनाकारी करावल जाईत रहल ।

महाभारत मे कृष्ण जमुना मे गेद निकालेला गईल रहलन जवना के याद करावेला फागुवा गित – कुद पडे जमुना मे लईका हो गोपाल गित बहुत सुमधुर अवाज मे गावत रहल रहे ।

कुछ जनानी लोग के सिँगार कईला से राह पर चलेवाला लोग के नजर पडल ओकरा के जनकारी करावेला फागुवा गित – सिकिया के काजर मत कर गोरी हो, चलत बटोहीया के मन ललचवलु से बाहर के लोग के नजर के देखावत रहल रहे ।

राह चलेवाला लोग कुछ सुन्दर जनानी के देखला वाद चेहरा ना देखला से चेहरा देखेला रास्ता पर आराम कर के राह देखत रहले ओ के फागुवा गित – कतेक विलमवलु गोरी हो हम प्रदेशी हो ओईसही वियाहे आईल लडकी आपन नहीयर से सझिया ससुरार अईला पर कुछ छुट गईल बा त ओकरा मगावेला नया पत्नी पति के कहेली उठ सईया लिख पाती भेज नहियर हो, झुमक मोरा छुटेला हो कोहबरवा गित से सन्देस देहल करत रहल जाए ।

अब नत सुतब राउर कोरवा लागेला केहुनिया के चोट गित अउरी विलि मे फतेङ्गी बोले बन मे बोले मोर मोर घर मे नया भउजाई अईली गाव मे भईल सोर जोगिरा सर सर सर से पूरा गाव गुनज उठत रहे जवन आज ओरागल बा ।

अभि नया मे ठिजे बजा के मोवाईल बजा के संकृती के ओरवारहल बा फिर से सभे जवान लोग मे चेतना होखो कि नासा कम खाये के आ आपन पहिलका गित के कईसे लेयावल जाई अउरी समाज मे प्रेम स्नेह बढावल जाई ओकरा ओर सभे के नजर पुगो ।

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