विश्व हिंदी दिवस : सिवान माटी की विभूतियां

विश्व हिंदी दिवस : सिवान माटी की विभूतियां

भारत के बिहार प्रदेश के सिवान जिला में अवस्थित दारौंदा प्रखंड के गुंजेश्वरी उच्च विद्यालय सह इण्टर कॉलेज रुकुंदीपुर के शिक्षक डॉ मन्नू राय सिवान जिला के स्वत्रंतता सेनानी,शिक्षाविद के जीवनी *सिवान माटी की विभूतियां* किताब के रूप में लिखले बानी। जेकर विमोचन सिवान साहित्य महोत्सव 2025 में कइल जाई। इ किताब ऐतिहासिक अउर साहित्यिक दृष्टिकोण से बहुती महत्वपूर्ण बा। इ किताब में सिवान जिला के एकावन अइसन सेनानी , शिक्षाविद, आ समाजसेवी महापुरुष के जीवनी शामिल बा, जवन लोग आपन व्यक्तित्व आ कृतित्व से समाज के एगो नया दिशा देवे के पुनीत काम कईले बा।

बिहार के सांस्कृतिक राजधानी सिवान क अतीत अत्यंत समृद्ध आ गौरवशाली रहल बा।पौराणिक,ऐतिहासिक,राजनैतिक, सामाजिक,ज्ञान विज्ञान साहित्य कला,संस्कृति सहित कईगो क्षेत्रन में सिवान के योगदान बिहार ही नाही, बल्की देश के इतिहास में भी अनुपम रहल बा। गुरू द्रोणाचार्य के तपोभूमि अउर संत शिरोमणि मैनिया बाबा के तपबल से दमकत आ नीलहा क्रांति के अग्रदूत बाबू ब्रजकिशोर प्रसाद,देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद , कौमी एकता के प्रतीक मौलाना मजहरूल हक से लेके बाबू नारायण प्रसाद सिंह आ बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री महामाया प्रसाद सिन्हा ले तक राजनीतिक आंदोलन की जमीन रहल बा । सिवान के स्वर्णिम व गौरवशाली इतिहास क संरक्षित अउर संवर्धन खातिर पुस्तक *सिवान माटी की विभूतियां* एगो सार्थक प्रयास बा। ए पुस्तक के लेखक बानी शिक्षक सह साहित्यकार डॉ. मन्नू राय , जवन बतईनी ह कि भारत में औपनिवेशिक शासन के खिलाफ संघर्ष के बाद जीत दिलावे वालन क्रांतिकारीयन क आज के नवाका पीढ़ी से अवगत करावे के उद्देश्य से पिछिला एक साल से सिवान जिला के सेनानी के जीवनी का संकलन कर रहल बानी।।आजादी के गुमनाम नायक के जीवनी पर आधारित इ किताब हमरी स्वत्रंतता संग्राम के भुलाइल बिसरल सेनानियन के याद करे खातिर एगो आपन प्रयास बा। जे देश के आजादी खातिर समर्पित भाव से ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष कईलस, अंग्रेजन क कठोर यातना सही के लड़त लड़त देश खातिर शहीद हो गइलन बकीर उ धीरे धीरे गुमनाम होत जात बालन , जवना में सिवान के मालवीय बैजनाथ प्रसाद उर्फ दाढ़ी बाबा,अमर स्वत्रंतता सेनानी ख्वाजा जाने अली चिश्ती निजामी,अंग्रेजों के कोठी के लुटेरा सेनानी शिवपूजन चौधरी,अगस्त क्रांति के पहिलका शहीद उमाकांत सिंह,मूर्धन्य इतिहासकार सैयद हसन अस्करी,बिहार में पुस्तकालय के सूत्रधार खुदा बख्श खां,महाराजगंज क्रांति के पहिलका शहीद फूलेना प्रसाद श्रीवास्तव, अगस्त क्रांति के शूरवीर शहीद शुभलाल महतो,आजादी की बलवेदी पर शहीद देव शरण सिंह,तिरंगा क रखवाला शहीद भृगुनाथ ठाकुर,महाराजगंज क्रांति के अमर शहीद किशोरी प्रसाद, काला पानी के सजायाफ्ता सेनानी श्यामदेव नारायण उर्फ राम सिंह, क्रांति पथ के संघतियां तारा रानी श्रीवास्तव,जन्मजात सेनानी कवि चंदेश्वर भारती,अमर सेनानी पूर्व मुख्यमंत्री महामाया प्रसाद सिन्हा,राष्ट्रीय आंदोलन के पथ प्रदर्शक श्रीकृष्ण कांत सिंह,महाराजगंज के मालवीय सेनानी उमाशंकर प्रसाद,स्वत्रंतता सेनानी अउर सहकारिता सम्राट पूर्व सांसद बाबू रामदेव सिंह,सद्भावना के प्रतीक सेनानी अर्जुन सिंह,राष्ट्रीय आंदोलन के नारी शक्ति प्रभावती देवी,राष्ट्रीय आंदोलन के अगुआ राम नगीना शर्मा,आजादी के मतवाला सेनानी विशेश्वर सिंह,स्वत्रंतता आंदोलन के सजग सिपाही शिवबचन भक्त, राष्ट्रीय आंदोलन के सेनानी मुखिया रामचंद्र राय,लोकगायकी से ब्रिटिश हुकूमत को हिलावे वाला जंग बहादुर सिंह,विरल विभूति सेनानी बाबू रघुवीर सिंह,अपराजेय व्यक्तित्व सेनानी मंगल दयाल सिंह, आजादी के गुमनाम क्रांतिकारी सेनानी बंसीलाल,आजादी के गुमनाम सिपाही शिवपूजन साह,आजादी के वीर सपूत रामलखन सिंह,आजादी की बलवेदी पर बलिराम राय,स्वत्रंतता आंदोलन के आधार रामाधार मिश्र,सिवान माटी के अमर सपूत महेंद्र शास्त्री, क्षेत्रीय गांधी पंडित बैजनाथ मिश्र, बंगरा के लाल सेनानी बाबू मुंशी सिंह, युद्धों के योद्धा विपिन बिहारी सिंह,मजदूरों के मसीहा कामरेड रामदेव सिंह,वंचित समाज क आवाज कामरेड सीताराम सिंह कुशवाहा,सादगी और समर्पण के प्रतीक घनश्याम शुक्ला,मानवता के मूरत लक्ष्मी नारायण यादव,शिक्षाविद बाबू सच्चिदानंद सिंह,ऐतिहासिक युगपुरुष शिक्षाविद प्रो बांके बिहारी मिश्र, अपराजेय व्यक्तित्व के स्वामी जगन्नाथ सिंह,महान विभूति शिक्षाविद रमेश प्रसाद सिंह,मानवीय संवेदना के दीपक शिशु पैगम्बर अंसारी,सिवान के लेनिन कामरेड चंद्रशेखर प्रसाद चंदू, शैक्षणिक संस्थानों के संस्थापक महादेव चौधरी के जीवनी संकलित बा। इ पुस्तक एही गुमनाम नायक के अविस्मरणीय संघर्ष आ समर्पण के कहानी के युवा पीढ़ी के सोझा लिवाये के कोशिश बा। इ शोधपरक ऐतिहासिक पुस्तक स्वत्रंतता आंदोलन क प्रामाणिक दस्तावेज के रूप में बिहार प्रदेश आ देश के कोने-कोने तक पहुंच के आजादी की लड़ाई में सिवान के वीर सपूतन के त्याग,बलिदान अउर समर्पण से समाज के अवगत कराई। इ पुस्तक सिवान जिला के 293 पंचायतन में संचालित सागरो शैक्षणिक संस्थानन के पुस्तकालयन में उपलब्ध करावल जाइ । जवना से अधिका से अधिका पढ़वइयन के पढ़े खातिर पुस्तक मिल सको।

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