तराई मे चईती छठ पर्व सुरु
तराई मे चईती छठ पर्व सुरु

वीरगंज ३० चईत
तराई मधेश सहित देश के अधिकांश जगहा मे आजु से चईती छठ पर्व के विधि सुरु भईल बा । चईत शुक्ल चतुर्थी (चौथी) से सप्तमी तक चार दिन अनेकन विधिसाथ मनावल जाएवाला पर्व के पहिलका दिन आजु बर्तालुु ‘नहाय–खाय’ (पवित्र स्नान करके शुद्ध खाएके) विधि से पर्व प्रारम्भ करत बाडन । पर्व के पहिलका दिन पवित्र स्नान करके व्रत सङ्कल्प करके शुद्ध खाना खाएके चलन बा ।
शरद आ वसन्त ऋतु मे करके बरीस मे दु बेर मनावल जाएवाला छठ सूर्य उपासना के पर्व ह । शरद ऋतु मे कातिक शुक्ल चौथी से सप्तमी तक आ वसन्त ऋतु मे चईत शुक्ल चौथी से सप्तमी तक समान विधि से ई पर्व मनावल जाला ।
मधेस प्रदेश के क्षेत्र मे छठ जनजन परिचालन होखेवाला महापर्व मानल जाला । पर्व के पहिलका दिन ‘नहाय–खाय’, दुसरका दिन दिनभर उपवास बरहके रात मे सख्खर मे बनावल खिर, रोटी खाके ‘खरना’, तिसरका दिनअर्थात् षष्टि तिथि मे निराहार उपवास रहके सँझिया डुब रहल सूर्य के पवित्र जलाशय के घाट मे पानी मे अघ्र्य देहल जाला, जउना के ‘सँझिया घाटे’ कहल जाला ।
अन्तिम दिन सप्तमी के दिन सबेरे उग रहल सूर्य के छठ घाट मे अघ्र्य देके पर्व सम्पन्न कईल जाला ।
छठ पर्व मे ठेकुवा, सहित के मिष्ठान्न परिकारसहित पाकल केरा के घरी आ आउर फलफूल तथा माटी आ बाँस से बनावल सामान प्रयोग कईल जाला । छठ सूर्य आ सूर्यपत्नी षष्टी के उपासना के पर्व ह ।
ई व्रत के प्रभाव से हरेक मनोकाङ्क्षा पूरा होखेके विश्वास कईल जाला । व्रत प्रभाव से छालाजन्य बेमारी कभो ना होखेके जनविश्वास बा । चईती छठ सुरु होखेसे पहिले चईत शुक्ल प्रतिपदा सँगे वासन्ती नवरात्र (चईते दशहरा) भी सुरु भईल बा । चईत शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक वासन्ती नवरात्र मनावल जाला । ई अवसर मे देवीपीठ मे पूजाआराधना करेवाला श्रद्धालु भक्तजन बढल बाडन ।






